राज्य में विज्ञापन जारी करने वाली संस्था सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (पीआरडी) ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत यह जानकारी दी है.
सरकार के अवर सचिव रामेश्वर लेयांगी ने बताया है कि राज्य सरकार ने साल 2014 से 12 दिसंबर 2018 तक विज्ञापन मद में ख़र्च के लिए 323 करोड़, 76 लाख, 81 हजार रुपये का आवंटन किया है.
इसमें से अधिकतर राशि खर्च भी कर दी गई है. इस दौरान दो वित्तीय वर्षो में सरकार ने एक रुपये भी नहीं बचाए और एक वित्तीय वर्ष में सिर्फ 620 रुपये की बचत की. इस साल 12 दिसंबर तक सरकार 62 करोड़ 20 लाख से भी अधिक रुपए ख़र्च कर चुकी है.
कोडरमा के सामाजिक कार्यकर्ता ओंकार विश्वकर्मा ने आरटीआई के तहत सरकार से यह जानकारी मांगी थी. सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने 17 दिसंबर को उनसे यह सूचना साझा की.
यह इत्तेफाक ही है कि यह सूचना झारखंड की भाजपा सरकार की चौथी वर्षगांठ से ठीक पहले सार्वजनिक हुई. इस कारण विपक्ष को बैठे-बिठाए बड़ा मुद्दा मिल गया है और संपूर्ण विपक्ष ने सरकार की आलोचना की है.
भाजपा नेता रघुवर दास ने 28 दिसंबर 2014 को झारखंड के दसवें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी. अपने कार्यकाल के चार साल पूरे होने पर भी सरकार ने ख़ूब विज्ञापन दिए हैं.
पूरे राज्य में सरकार की उपलब्धियों के होर्डिंग्स लगाए गए हैं. साथ ही अ़खबारों और निजी चैनलों को भी विज्ञापन जारी किए गए हैं.
क्यों मांगी यह सूचना
ओंकार विश्वकर्मा ने बीबीसी से कहा, "मैं हर जगह सरकार के होर्डिंग्स देखता हूं. इनमे मुख्यमंत्री जी की बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगी होती हैं. अख़बारों के पहले पन्ने सिर्फ सरकारी विज्ञापनों से भरे रहते हैं. पहले ऐसा नहीं होता था."
"इस कारण मुझे जिज्ञासा हुई कि इन विज्ञापनों मे सरकार आखिर कितने पैसे खर्च कर रही है. तब मैंने आरटीआई लगाकर सरकार से इस ख़र्च का ब्योरा मांगा. इसमें ख़ुलासा हुआ कि चार साल के अंदर सरकार ने विज्ञापन मद में आवंटन सीधे दोगुना कर दिया है."
उन्होंने कहा कि साल 2014-15 के लिए इस मद में आवंटित 40 करोड़ की जगह 2018-19 में यह बजट 80 करोड़ कर दिया गया है.
"इस राज्य में लोगों की भूख से मौतें हो रही है और सरकार अपनी ब्रांडिंग करने में मस्त है. इन्हें बेपर्दा किया जाना चाहिए."
साल 2017 में 28 सितंबर को प्रदेश के सिमडेगा ज़िले के कारीमाटी में 11 साल की संतोषी कुमारी की मौत भूख से हो गई थी. उनकी मां कोयली देवी बताती हैं कि उनकी बेटी ने 'भात-भात' की रट लगाते हुए दम तोड़ दिया था.
यह मामला सुर्ख़ियों में रहा था और झारखंड समेत पूरे देश में भूख से हो रही मौत पर गंभीर बहसों की शुरुआत हुई थी. कुछ सोशल एक्टिविस्ट द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों के मुताबिक़, पिछले चार साल के दौरान देश में 56 लोगों की मौत भूख से हो चुकी है. इनमें से 42 मौतें 2017-18 के दौरान हुई हैं. इन आंकड़ों को मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता रितिका खेड़ा और सिराज दत्ता ने स्वाति नारायण की मदद से तैयार किया है.
Thursday, December 27, 2018
Tuesday, December 18, 2018
अठावले ने कहा, धीरे-धीरे मिलेंगे 15 लाख रुपए: प्रेस रिव्यू
प्रधानमंत्री के 2014 के चुनाव वादों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री और एनडीए में सहयोगी रामदास अठावले ने कहा है कि लोगों के बैंक खाते में 15 लाख रुपए आएंगे.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उन्होंने कहा कि 15 लाख रुपए एक बार में नहीं आ जाएंगे, वो धीरे-धीरे लोगों को मिलेंगे.
उन्होंने कहा कि सरकार के पास ज़्यादा पैसा नहीं है और आरबीआई से पैसा मांगा गया था, लेकिन वो पैसा दे नहीं रही है.
अठावले के मुताबिक वादा पूरा करने में कुछ तकनीकी मुश्किलें आ रही हैं, "लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बहुत ही सक्रिय प्रधानमंत्री हैं और उनके कार्यकाल में लोगों की कई समस्याएं दूर हुई हैं."
आर्थिक संकट से उबरने के लिए पाकिस्तान कई दिनों से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) से मदद की गुहार लगा रहा है.
लेकिन बेलआउट पैकेज के लिए अमरीका पाकिस्तान के सामने कुछ शर्ते रख सकता है. ये जानकारी अमरीका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर दी है.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक अमरीका कह सकता है कि पाकिस्तान को आईएमएफ़ से पैकेज तभी मिलेगी जब वो:
टाइम्स ऑफ इंडियाअखबार के मुताबिक उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 99% वस्तुओं को जीएसटी के 18% या उससे कम के स्लैब में लाने के लिए काम कर रही है.
उनका कहना है कि जीएसटी का 28% का स्लैब सिर्फ एक फीसदी लग्ज़री उत्पादों के लिए होगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा, "जीएसटी से पहले देश में केवल 65 लाख उद्यम ही पंजीकृत थे, जिसमें 55 लाख की बढ़ोतरी हुई है."
राहुल गठबंधन के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नहीं: अखिलेश
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीवारी से वो सहमत नहीं हैं.
अमर उजाला के मुताबिक अखिलेश ने मंगलवार को कहा, अगर कोई ऐसा विचार दे रहा है तो ज़रूरी नहीं है कि गठबंधन की भी यही राय हो.
डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन ने दो दिन पहले राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी का समर्थन किया था.
अखिलेश ने कहा कि महागठबंधन की बात चल रही है, लेकिन अबतक इसने कोई मूर्त रूप नहीं लिया है. इसलिए इस तरह के प्रस्ताव ज़्यादा मायने नहीं रखते.
हर किसान का कर्ज़ माफ कराकर रहेंगे'
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसानों का कर्ज़ माफ करने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है.
द हिंदू की ख़बर के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी और विपक्ष के दूसरे दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव डालकर पूरे देश के किसानों का कर्ज़ माफ करवाएंगे.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उन्होंने कहा कि 15 लाख रुपए एक बार में नहीं आ जाएंगे, वो धीरे-धीरे लोगों को मिलेंगे.
उन्होंने कहा कि सरकार के पास ज़्यादा पैसा नहीं है और आरबीआई से पैसा मांगा गया था, लेकिन वो पैसा दे नहीं रही है.
अठावले के मुताबिक वादा पूरा करने में कुछ तकनीकी मुश्किलें आ रही हैं, "लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बहुत ही सक्रिय प्रधानमंत्री हैं और उनके कार्यकाल में लोगों की कई समस्याएं दूर हुई हैं."
आर्थिक संकट से उबरने के लिए पाकिस्तान कई दिनों से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) से मदद की गुहार लगा रहा है.
लेकिन बेलआउट पैकेज के लिए अमरीका पाकिस्तान के सामने कुछ शर्ते रख सकता है. ये जानकारी अमरीका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर दी है.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक अमरीका कह सकता है कि पाकिस्तान को आईएमएफ़ से पैकेज तभी मिलेगी जब वो:
टाइम्स ऑफ इंडियाअखबार के मुताबिक उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 99% वस्तुओं को जीएसटी के 18% या उससे कम के स्लैब में लाने के लिए काम कर रही है.
उनका कहना है कि जीएसटी का 28% का स्लैब सिर्फ एक फीसदी लग्ज़री उत्पादों के लिए होगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा, "जीएसटी से पहले देश में केवल 65 लाख उद्यम ही पंजीकृत थे, जिसमें 55 लाख की बढ़ोतरी हुई है."
राहुल गठबंधन के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नहीं: अखिलेश
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीवारी से वो सहमत नहीं हैं.
अमर उजाला के मुताबिक अखिलेश ने मंगलवार को कहा, अगर कोई ऐसा विचार दे रहा है तो ज़रूरी नहीं है कि गठबंधन की भी यही राय हो.
डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन ने दो दिन पहले राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी का समर्थन किया था.
अखिलेश ने कहा कि महागठबंधन की बात चल रही है, लेकिन अबतक इसने कोई मूर्त रूप नहीं लिया है. इसलिए इस तरह के प्रस्ताव ज़्यादा मायने नहीं रखते.
हर किसान का कर्ज़ माफ कराकर रहेंगे'
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसानों का कर्ज़ माफ करने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है.
द हिंदू की ख़बर के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी और विपक्ष के दूसरे दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव डालकर पूरे देश के किसानों का कर्ज़ माफ करवाएंगे.
Friday, December 14, 2018
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सौदे में कारोबारी पक्षपात के सबूत नहीं मिले; सभी याचिकाएं खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की निगरानी में राफेल डील की जांच की मांग से जुड़ी संभी याचिकाएं शुक्रवार को खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा- राफेल की खरीद प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है। इसमें कारोबारी पक्षपातों जैसी कोई बात सामने नहीं आई है। 14 नवंबर को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 3 अहम बातें
ऐसे मामले में न्यायिक समीक्षा का नियम तय नहीं है। राफेल सौदे की प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है। 36 विमान खरीदने के फैसले पर सवाल उठाना गलत है।
रिलायंस को ऑफसेट पार्टनर चुनने में कमर्शियल फेवर के कोई सबूत नहीं। देश फाइटर एयरक्राफ्ट की तैयारियों में कमी को नहीं झेल सकता।
कुछ लोगों की धारणा के आधार पर कोर्ट कोई आदेश नहीं दे सकता। इसलिए सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं।
अनिल अंबानी ने कहा- आरोप राजनीति से प्रेरित थे
कोर्ट के फैसले पर रिलायंस डिफेंस के मालिक अनिल अंबानी ने कहा- हम राष्ट्र सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल पर अभी तक दाखिल सभी पीआईएल को खारिज कर दिया है और हम इसका स्वागत करते हैं। रिलायंस ग्रुप और मेरे खिलाफ जितने भी आरोप लगाए गए सभी आधारहीन और राजनीति से प्रेरित थे।
दोबारा अपील की जा सकती है
याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कोर्ट के फैसले को गलत बताया। उन्होंने कहा कि एयरफोर्स ने कभी नहीं कहा कि 36 राफेल चाहिए। उससे पूछे बगैर मोदीजी ने फ्रांस जाकर समझौता कर लिया। तय कीमत से ज्यादा पैसा दिया गया। विमान की कीमतों पर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी गई। इसकी हमें कोई जानकारी नहीं दी गई। कोर्ट ने ऑफसेट पार्टनर चुनने के तरीके को भी गलत नहीं माना। उसका कहना है कि ऑफसेट पार्टनर दैसो ने चुना जबकि रक्षा सौदे में बिना सरकार की सहमति के कोई फैसला नहीं लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुनर्विचार याचिका दायर करने के बारे में तय किया जाएगा।
जांच की मांग के लिए 3 से ज्यादा याचिकाएं दायर हुई थीं
इस मामले में अधिवक्ता एमएल शर्मा, विनीत ढांडा ने याचिका दायर की थी। इसके बाद आप नेता संजय सिंह ने भी याचिका दायर की।
तीन याचिकाएं दायर होने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने याचिकाएं दायर की थीं। इसमें कहा गया था कि अदालत सीबीआई को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे।
कीमत पर सीलबंद दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपा था
सरकार ने अदालत और याचिकाकर्ताओं को डील के संबंध में लिए गए फैसलों के दस्तावेज सौंपे थे। राफेल की कीमत को लेकर एक अलग सीलबंद दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपा गया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 3 अहम बातें
ऐसे मामले में न्यायिक समीक्षा का नियम तय नहीं है। राफेल सौदे की प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है। 36 विमान खरीदने के फैसले पर सवाल उठाना गलत है।
रिलायंस को ऑफसेट पार्टनर चुनने में कमर्शियल फेवर के कोई सबूत नहीं। देश फाइटर एयरक्राफ्ट की तैयारियों में कमी को नहीं झेल सकता।
कुछ लोगों की धारणा के आधार पर कोर्ट कोई आदेश नहीं दे सकता। इसलिए सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं।
अनिल अंबानी ने कहा- आरोप राजनीति से प्रेरित थे
कोर्ट के फैसले पर रिलायंस डिफेंस के मालिक अनिल अंबानी ने कहा- हम राष्ट्र सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल पर अभी तक दाखिल सभी पीआईएल को खारिज कर दिया है और हम इसका स्वागत करते हैं। रिलायंस ग्रुप और मेरे खिलाफ जितने भी आरोप लगाए गए सभी आधारहीन और राजनीति से प्रेरित थे।
दोबारा अपील की जा सकती है
याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कोर्ट के फैसले को गलत बताया। उन्होंने कहा कि एयरफोर्स ने कभी नहीं कहा कि 36 राफेल चाहिए। उससे पूछे बगैर मोदीजी ने फ्रांस जाकर समझौता कर लिया। तय कीमत से ज्यादा पैसा दिया गया। विमान की कीमतों पर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी गई। इसकी हमें कोई जानकारी नहीं दी गई। कोर्ट ने ऑफसेट पार्टनर चुनने के तरीके को भी गलत नहीं माना। उसका कहना है कि ऑफसेट पार्टनर दैसो ने चुना जबकि रक्षा सौदे में बिना सरकार की सहमति के कोई फैसला नहीं लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुनर्विचार याचिका दायर करने के बारे में तय किया जाएगा।
जांच की मांग के लिए 3 से ज्यादा याचिकाएं दायर हुई थीं
इस मामले में अधिवक्ता एमएल शर्मा, विनीत ढांडा ने याचिका दायर की थी। इसके बाद आप नेता संजय सिंह ने भी याचिका दायर की।
तीन याचिकाएं दायर होने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने याचिकाएं दायर की थीं। इसमें कहा गया था कि अदालत सीबीआई को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे।
कीमत पर सीलबंद दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपा था
सरकार ने अदालत और याचिकाकर्ताओं को डील के संबंध में लिए गए फैसलों के दस्तावेज सौंपे थे। राफेल की कीमत को लेकर एक अलग सीलबंद दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपा गया था।
Thursday, November 22, 2018
क्या शिवसेना विश्व हिंदू परिषद से राम मंदिर का मुद्दा छीन लेगी?
अयोध्या, मुंबई और बैंगलुरु में धर्म सभा की तारीख़ का ऐलान करने के लिए पिछले हफ़्ते लखनऊ आए विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपतराय ने कई बार पूछने के बावजूद इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया कि धर्म सभा की तारीख़ 25 नवंबर को ही क्यों रखी जा रही है और इतने बड़े कार्यक्रम की घोषणा इतनी जल्दबाज़ी में क्यों हो रही है?
चंपतराय ने इन दोनों सवालों के जवाब नहीं दिए और दिए भी होते तो शायद वो वैसे न होते जो मेरे जैसे दूसरे पत्रकारों के दिमाग़ में उमड़ रहे थे.
दरअसल, अयोध्या में मंदिर-मस्जिद विवाद की सुनवाई को जनवरी तक टालने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद मंदिर निर्माण को लेकर जिस तरह हर तरफ़ मांग हो रही थी, प्रवीण तोगड़िया अपने अंतरराष्ट्रीय हिन्दू संगठन के ज़रिए अयोध्या में शक्ति प्रदर्शन कर चुके थे और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी 25 नवंबर को अयोध्या में उसी मक़सद से आ रहे थे, इसे देखते हुए राम मंदिर आंदोलन का एक तरह से पर्याय बन चुकी विश्व हिन्दू परिषद का चुप बैठे रहना लोगों के गले नहीं उतर रहा था.
एक लाख लोग अयोध्या पहुंचेंगे
चंपतराय ने पिछले हफ़्ते अयोध्या और लखनऊ दोनों जगह मीडिया से बात की और उनका ज़ोर लगातार इस बात पर रहा था कि 'जनता की भावना और आस्था का सवाल है राम मंदिर और अब तत्काल उस पर कुछ फ़ैसला होना चाहिए'.
उनका दावा ये भी था कि कम से कम एक लाख लोग 25 नवंबर को अयोध्या पहुंचेंगे. लेकिन ये एक लाख लोग अयोध्या क्यों पहुंचेंगे, मंदिर निर्माण के लिए किस पर दबाव बनाएंगे और अयोध्या जाकर ये लोग करेंगे क्या, ऐसे सवालों पर उन्होंने कोई माकूल जवाब नहीं दिया.
लेकिन सबसे अहम सवाल यही है कि विहिप ने आनन-फ़ानन में धर्म सभा की तारीख़ 25 नवंबर ही क्यों चुनी है?
लखनऊ में टाइम्स ऑफ़ इंडिया के वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मिश्र कहते हैं, "विहिप को लगा कि कहीं ऐसा न हो कि उसके हाथ से वो मुद्दा निकलकर शिवसेना या फिर तोगड़िया जैसे कुछ अन्य लोगों के हाथ में चला जाए जिसे वो अपना मानकर चलती है. ऐसा इसलिए क्योंकि मंदिर मुद्दे से शिवसेना न सिर्फ़ शुरू से जुड़ी रही है बल्कि किसी अन्य संगठन की तुलना में सबसे ज़्यादा आक्रामक भी रही है."
सुभाष मिश्र कहते हैं कि शिवसेना का उत्तर प्रदेश में भले ही कोई बहुत प्रभाव न हो लेकिन तोगड़िया के साथ विहिप के तमाम ऐसे लोग जुड़े हैं जो उन्हें विहिप से निकाले जाने से नाराज़ थे.
दूसरे, राम मंदिर के मामले में यदि कोई भी संगठन ज़ोर-शोर से आवाज़ उठाएगा, तो ज़ाहिर है, हिन्दुओं का एक बड़ा तबका कहीं न कहीं उसके प्रभाव में आ ही जाएगा.
शिवसेना का अयोध्या आगमन
दरअसल, शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने दो महीने पहले ही 25 नवंबर को अयोध्या आने और यहां राम मंदिर के लिए संकल्प लेने का ऐलान किया था.
शिवसेना सांसद संजय राउत इस दौरान कई बार अयोध्या और लखनऊ आकर इसके लिए माहौल का जायज़ा ले चुके हैं और पिछले दो दिनों से अयोध्या में ही डेरा डाले हुए हैं.
गुरुवार को उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि शिवसेना के कई सांसद और विधायक अयोध्या पहुंचने लगे हैं और 24 नवंबर को बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचेंगे.
उद्धव ठाकरे का कार्यक्रम पहले राम लला का दर्शन करने, साधु-संतों के साथ बातचीत करने और फिर 25 नवंबर को एक जनसभा को संबोधित करने का था लेकिन प्रशासनिक सख़्ती के बाद जनसभा को फ़िलहाल स्थगित कर दिया गया है.
जानकारों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे जिस तैयारी और प्रचार-प्रसार के साथ अयोध्या आ रहे हैं, वो विहिप और उससे जुड़े संगठनों को हैरान करने के लिए पर्याप्त था.
चंपतराय ने इन दोनों सवालों के जवाब नहीं दिए और दिए भी होते तो शायद वो वैसे न होते जो मेरे जैसे दूसरे पत्रकारों के दिमाग़ में उमड़ रहे थे.
दरअसल, अयोध्या में मंदिर-मस्जिद विवाद की सुनवाई को जनवरी तक टालने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद मंदिर निर्माण को लेकर जिस तरह हर तरफ़ मांग हो रही थी, प्रवीण तोगड़िया अपने अंतरराष्ट्रीय हिन्दू संगठन के ज़रिए अयोध्या में शक्ति प्रदर्शन कर चुके थे और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी 25 नवंबर को अयोध्या में उसी मक़सद से आ रहे थे, इसे देखते हुए राम मंदिर आंदोलन का एक तरह से पर्याय बन चुकी विश्व हिन्दू परिषद का चुप बैठे रहना लोगों के गले नहीं उतर रहा था.
एक लाख लोग अयोध्या पहुंचेंगे
चंपतराय ने पिछले हफ़्ते अयोध्या और लखनऊ दोनों जगह मीडिया से बात की और उनका ज़ोर लगातार इस बात पर रहा था कि 'जनता की भावना और आस्था का सवाल है राम मंदिर और अब तत्काल उस पर कुछ फ़ैसला होना चाहिए'.
उनका दावा ये भी था कि कम से कम एक लाख लोग 25 नवंबर को अयोध्या पहुंचेंगे. लेकिन ये एक लाख लोग अयोध्या क्यों पहुंचेंगे, मंदिर निर्माण के लिए किस पर दबाव बनाएंगे और अयोध्या जाकर ये लोग करेंगे क्या, ऐसे सवालों पर उन्होंने कोई माकूल जवाब नहीं दिया.
लेकिन सबसे अहम सवाल यही है कि विहिप ने आनन-फ़ानन में धर्म सभा की तारीख़ 25 नवंबर ही क्यों चुनी है?
लखनऊ में टाइम्स ऑफ़ इंडिया के वरिष्ठ पत्रकार सुभाष मिश्र कहते हैं, "विहिप को लगा कि कहीं ऐसा न हो कि उसके हाथ से वो मुद्दा निकलकर शिवसेना या फिर तोगड़िया जैसे कुछ अन्य लोगों के हाथ में चला जाए जिसे वो अपना मानकर चलती है. ऐसा इसलिए क्योंकि मंदिर मुद्दे से शिवसेना न सिर्फ़ शुरू से जुड़ी रही है बल्कि किसी अन्य संगठन की तुलना में सबसे ज़्यादा आक्रामक भी रही है."
सुभाष मिश्र कहते हैं कि शिवसेना का उत्तर प्रदेश में भले ही कोई बहुत प्रभाव न हो लेकिन तोगड़िया के साथ विहिप के तमाम ऐसे लोग जुड़े हैं जो उन्हें विहिप से निकाले जाने से नाराज़ थे.
दूसरे, राम मंदिर के मामले में यदि कोई भी संगठन ज़ोर-शोर से आवाज़ उठाएगा, तो ज़ाहिर है, हिन्दुओं का एक बड़ा तबका कहीं न कहीं उसके प्रभाव में आ ही जाएगा.
शिवसेना का अयोध्या आगमन
दरअसल, शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने दो महीने पहले ही 25 नवंबर को अयोध्या आने और यहां राम मंदिर के लिए संकल्प लेने का ऐलान किया था.
शिवसेना सांसद संजय राउत इस दौरान कई बार अयोध्या और लखनऊ आकर इसके लिए माहौल का जायज़ा ले चुके हैं और पिछले दो दिनों से अयोध्या में ही डेरा डाले हुए हैं.
गुरुवार को उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि शिवसेना के कई सांसद और विधायक अयोध्या पहुंचने लगे हैं और 24 नवंबर को बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचेंगे.
उद्धव ठाकरे का कार्यक्रम पहले राम लला का दर्शन करने, साधु-संतों के साथ बातचीत करने और फिर 25 नवंबर को एक जनसभा को संबोधित करने का था लेकिन प्रशासनिक सख़्ती के बाद जनसभा को फ़िलहाल स्थगित कर दिया गया है.
जानकारों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे जिस तैयारी और प्रचार-प्रसार के साथ अयोध्या आ रहे हैं, वो विहिप और उससे जुड़े संगठनों को हैरान करने के लिए पर्याप्त था.
Monday, November 12, 2018
贸易战正酣、习特会在即:中美高层对话“管控危机”成关键词
美国中期选举刚刚尘埃落定,中美高层随即在华盛顿重启中美外交与安全对话,为月底两国元首在阿根廷G20峰会的会晤铺垫。
这场高层对话,“管控分歧”成为关键词,但两国在南海、新疆、台湾、人权问题上,继续争锋相对。
经贸本不是这场对话的主轴,但中方重申中国希望就贸易问题谈判的立场,而美方则未多作表态。
对话背景为何?
中美在2017年开始开展中美外交与安全对话,这是由两国外交部与国防部最高级别官员进行磋商的机制。中共中央政治局委员、中央外事工作委员会办公室主任杨洁篪、国务委员兼国防部长魏凤和与美国国务卿蓬佩奥(Mike Pompeo)、国防部长马蒂斯(James Mattis)参与了本次对话。
今年的对话原定10月在北京举行,但因故推迟。中美关系观察家利明璋(Bill Bishop)引述信源称,中方表示魏凤和在原定会议日期另有行程安排,背后的原因可能是抗议美国在九月底针对中国解放军购买俄罗斯武器进行制裁。直到对话在华盛顿重启前三天,两国才正式宣布对话日期。
近一年来,中美不仅在经济与贸易上矛盾频发,两国军方也多次出现摩擦。4月,罗斯福号航空母舰与辽宁舰航母舰队在南海对峙。9月,美国迪凯特号驱逐舰在南沙群岛附近海域与一艘中国军舰险些相撞。10月,美国出动两架战略轰炸机飞跃南海。
这是中美防长在今年第三次会面,美国国防部长马蒂斯称美国军方致力于与中国军方一同建立预防危机的机制。中国国防部长魏凤和表示,这次对话是中美两军进一步进行战略沟通,希望两军关系成为两国关系的稳定器。
中美重启外交与安全对话之际,也正值中期选举结束、美国总统特朗普及中国国家主席习近平即将会晤之际。在记者会上,两国代表都多次提到,此次对话是为月底的习特会铺路。两国高层官员此时的表态,一定程度上体现了习近平和特朗普对话的基础。
这场高层对话,“管控分歧”成为关键词,但两国在南海、新疆、台湾、人权问题上,继续争锋相对。
经贸本不是这场对话的主轴,但中方重申中国希望就贸易问题谈判的立场,而美方则未多作表态。
对话背景为何?
中美在2017年开始开展中美外交与安全对话,这是由两国外交部与国防部最高级别官员进行磋商的机制。中共中央政治局委员、中央外事工作委员会办公室主任杨洁篪、国务委员兼国防部长魏凤和与美国国务卿蓬佩奥(Mike Pompeo)、国防部长马蒂斯(James Mattis)参与了本次对话。
今年的对话原定10月在北京举行,但因故推迟。中美关系观察家利明璋(Bill Bishop)引述信源称,中方表示魏凤和在原定会议日期另有行程安排,背后的原因可能是抗议美国在九月底针对中国解放军购买俄罗斯武器进行制裁。直到对话在华盛顿重启前三天,两国才正式宣布对话日期。
近一年来,中美不仅在经济与贸易上矛盾频发,两国军方也多次出现摩擦。4月,罗斯福号航空母舰与辽宁舰航母舰队在南海对峙。9月,美国迪凯特号驱逐舰在南沙群岛附近海域与一艘中国军舰险些相撞。10月,美国出动两架战略轰炸机飞跃南海。
这是中美防长在今年第三次会面,美国国防部长马蒂斯称美国军方致力于与中国军方一同建立预防危机的机制。中国国防部长魏凤和表示,这次对话是中美两军进一步进行战略沟通,希望两军关系成为两国关系的稳定器。
中美重启外交与安全对话之际,也正值中期选举结束、美国总统特朗普及中国国家主席习近平即将会晤之际。在记者会上,两国代表都多次提到,此次对话是为月底的习特会铺路。两国高层官员此时的表态,一定程度上体现了习近平和特朗普对话的基础。
अनंत कुमार का निधन, कल होगा अंतिम संस्कार, आज बेंगलुरू जाएंगे मोदी
बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार का निधन हो गया है. वह पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे. अनंत कुमार कैंसर से पीड़ित थे. उन्होंने 59 साल की उम्र में बेंगलुरु में अंतिम सांस ली. अनंत कुमार कर्नाटक के बेंगलुरु साउथ से सांसद थे.वह केंद्र सरकार में संसदीय कार्यमंत्री थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आज रात 8.30 बजे बेंगलुरु जाएंगे.
उन्होंने आज(सोमवार) 1 बजकर 50 मिनट पर अंतिम सांस ली. अनंत कुमार के पार्थिव शरीर को सुबह 9 बजे के बाद बेंगलुरु के नेशनल कॉलेज ग्राउंड पर रखा जाएगा, जहां पर लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे पाएंगे. उनके निधन पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पूरे देश में राष्ट्रध्वज आधा झुकाने का निर्देश दिया है. इसी के मुताबिक राष्ट्रीय शोक भी मनाया जाएगा.
अनंत कुमार के निधन पर शोक जताते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, 'अनंत कुमार का निधन देश के सार्वजनिक जीवन में बहुत बड़ी क्षति है, खासकर कर्नाटक के लोगों के लिए. उनके परिवार, सहयोगी और अनंत शुभेच्छुओं को मेरी सांत्वना.'
अनंत कुमार के निधन पर शोक जताते हुए उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा, 'वे कुछ समय से बीमार थे लेकिन ऐसा होगा यह नहीं सोचा था. हमें लग रहा था कि वे जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे और लोगों की सेवा पुनः शुरू करेंगे. मैं उनकी पत्नी और बच्चों को तहे दिल से सांत्वना प्रेषित करता हूं.'
पीएम मोदी ने ट्वीट कर अनंत कुमार के निधन पर शोक जताया है. उन्होंने लिखा कि अहम सहयोगी और दोस्त के निधन से दुखी हूं. अनंत कुमार के परिवार और समर्थकों के लिए संवेदनाएं. उन्होंने कर्नाटक में पार्टी को मजबूत किया.
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, अपने अति वरिष्ठ सहयोगी और मित्र के असामयिक निधन से दुखी और सदमे में हूं. वे एक मंझे हुए सांसद थे जिन्होंने अपनी पूरी काबिलियत से देश की भरपूर सेवा की. लोक कल्याण के लिए उनके जुनून और समर्पण की जितनी तारीफ की जाए, कम है. दुख की इस घड़ी में मैं उनके परिजनों के साथ हूं.
अनंत कुमार के निधन पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा, 'अनंत कुमार जी के निधन से मैं दुखी हूं. उनके परिजनों और मित्रों को मेरी सांत्वना. भगवान उनकी आत्मा को शांति दे. ओम शांति.'
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने शोक जताते हुए कहा, 'अनंत कुमार जी का निधन देश और मेरे व्यक्तिगत जीवन के लिए बहुत बड़ी क्षति है. वे हमलोगों के अनन्य मित्र और महान मार्गदर्शक थे. हाल में बीते कर्नाटक चुनाव में हमलोगों ने एकसाथ काम किया था. उनका अचानक जाना सबके लिए सदमा है. बेंगलुरु में उनकी अंतिम यात्रा में हमलोग शामिल होंगे.'
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, 'अनंत कुमार जी के निधन से आहत हूं. वे पूरी पार्टी के लिए आदरणीय और मार्गदर्शक थे. शोक संतप्त परिजनों को मेरी सांत्वना है.'
अनंत कुमार के निधन पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, 'अनंत जी के निधन से बीजेपी और देश की राजनीति में ऐसा सूनापन पैदा हुआ है जिसे भर पाना मुश्किल है. भगवान उनके परिवार को दुख सहने की क्षमता दे. उनके परिजनों को मेरी सांत्वना.'
कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने दुख जताते हुए कहा, 'मैंने अपना परम मित्र खो दिया. वे आदर्शों वाले राजनेता थे जिन्होंने एक सांसद और मंत्री के तौर पर देश को बहुत कुछ दिया. भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिजनों और सगे-संबंधियों को दुख सहने की क्षमता दे.'
उन्होंने आज(सोमवार) 1 बजकर 50 मिनट पर अंतिम सांस ली. अनंत कुमार के पार्थिव शरीर को सुबह 9 बजे के बाद बेंगलुरु के नेशनल कॉलेज ग्राउंड पर रखा जाएगा, जहां पर लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे पाएंगे. उनके निधन पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पूरे देश में राष्ट्रध्वज आधा झुकाने का निर्देश दिया है. इसी के मुताबिक राष्ट्रीय शोक भी मनाया जाएगा.
अनंत कुमार के निधन पर शोक जताते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, 'अनंत कुमार का निधन देश के सार्वजनिक जीवन में बहुत बड़ी क्षति है, खासकर कर्नाटक के लोगों के लिए. उनके परिवार, सहयोगी और अनंत शुभेच्छुओं को मेरी सांत्वना.'
अनंत कुमार के निधन पर शोक जताते हुए उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा, 'वे कुछ समय से बीमार थे लेकिन ऐसा होगा यह नहीं सोचा था. हमें लग रहा था कि वे जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे और लोगों की सेवा पुनः शुरू करेंगे. मैं उनकी पत्नी और बच्चों को तहे दिल से सांत्वना प्रेषित करता हूं.'
पीएम मोदी ने ट्वीट कर अनंत कुमार के निधन पर शोक जताया है. उन्होंने लिखा कि अहम सहयोगी और दोस्त के निधन से दुखी हूं. अनंत कुमार के परिवार और समर्थकों के लिए संवेदनाएं. उन्होंने कर्नाटक में पार्टी को मजबूत किया.
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा, अपने अति वरिष्ठ सहयोगी और मित्र के असामयिक निधन से दुखी और सदमे में हूं. वे एक मंझे हुए सांसद थे जिन्होंने अपनी पूरी काबिलियत से देश की भरपूर सेवा की. लोक कल्याण के लिए उनके जुनून और समर्पण की जितनी तारीफ की जाए, कम है. दुख की इस घड़ी में मैं उनके परिजनों के साथ हूं.
अनंत कुमार के निधन पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा, 'अनंत कुमार जी के निधन से मैं दुखी हूं. उनके परिजनों और मित्रों को मेरी सांत्वना. भगवान उनकी आत्मा को शांति दे. ओम शांति.'
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने शोक जताते हुए कहा, 'अनंत कुमार जी का निधन देश और मेरे व्यक्तिगत जीवन के लिए बहुत बड़ी क्षति है. वे हमलोगों के अनन्य मित्र और महान मार्गदर्शक थे. हाल में बीते कर्नाटक चुनाव में हमलोगों ने एकसाथ काम किया था. उनका अचानक जाना सबके लिए सदमा है. बेंगलुरु में उनकी अंतिम यात्रा में हमलोग शामिल होंगे.'
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, 'अनंत कुमार जी के निधन से आहत हूं. वे पूरी पार्टी के लिए आदरणीय और मार्गदर्शक थे. शोक संतप्त परिजनों को मेरी सांत्वना है.'
अनंत कुमार के निधन पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, 'अनंत जी के निधन से बीजेपी और देश की राजनीति में ऐसा सूनापन पैदा हुआ है जिसे भर पाना मुश्किल है. भगवान उनके परिवार को दुख सहने की क्षमता दे. उनके परिजनों को मेरी सांत्वना.'
कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने दुख जताते हुए कहा, 'मैंने अपना परम मित्र खो दिया. वे आदर्शों वाले राजनेता थे जिन्होंने एक सांसद और मंत्री के तौर पर देश को बहुत कुछ दिया. भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिजनों और सगे-संबंधियों को दुख सहने की क्षमता दे.'
Subscribe to:
Comments (Atom)