लोकसभा चुनावों के तीसरे चरण में मंगलवार को 13 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 117 लोकसभा सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं. इनमें गुजरात, केरल, महाराष्ट्र और कर्नाटक की 74 सीटें निर्णायक मानी जा रही हैं.
117 सीटों पर 1,612 उम्मीदवार अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं. इनमें 314 प्रत्याशी राष्ट्रीय दलों से, 76 क्षेत्रीय दलों से, 492 गैर मान्यता प्राप्त दलों से और 712 निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं.
तीसरे चरण की ख़ास बातें
इस चरण में मैनपुरी, पीलीभीत, रामपुर, मधेपुरा, मालदा उत्तर, वायनाड और गांधी नगर जैसी ख़ास सीटें शामिल हैं.
वायनाड से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और गांधीनगर से बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह चुनाव मैदान में.
सीटों की संख्या के लिहाज़ से 2019 लोकसभा चुनाव का सबसे बड़ा चरण है.
गुजरात और केरल की सभी लोकसभा सीटों पर मतदान.
चुनाव आयोग के मुताबिक दोपहर 1 बजे तक लगभग 37.89 फ़ीसदी मत डाले गए.
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में कांग्रेस और टीएमसी के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प में वोट डालने के लिए खड़े एक युवक ही हत्या. चुनाव आयोग ने इस पर ज़िला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में वोट डाला. इससे पहले उन्होंने गांधीनगर में अपनी मां हीराबेन से मिलकर आशीर्वाद लिया. हीराबेन ने प्रधानमंत्री के मतदान करने से पहले उनका मुंह मीठा कराया. ये तस्वीरें बीजेपी मीडिया सेल ने जारी कीं.
प्रधानमंत्री ने कहा, "आतंकवाद का शस्त्र आईईडी होता है और लोकतंत्र का शस्त्र वोटर आईडी होता है. मुझे विश्वास है कि वोटर आईडी की ताक़त आईईडी से अनेक अनेक गुना ज़्यादा है. हम इस वोटर आईडी कार्ड का महत्व समझें और अधिकतम वोट करें."
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दुर्ग में मतदान किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि मुझे जो कुछ भी कहना था मैंनै अपनी पार्टी और प्रत्याशी के पक्ष में कहा, अब मतदाता तय करेंगे. वो ही वास्तविक जज हैं.
बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने अहमदाबाद के शाहपुर हिंदी स्कूल में मतदान किया.
किस राज्य की किस सीट पर मतदान?
इस चरण में 15 राज्यों की 117 सीटों पर सुबह सात बजे से मतदान शुरू होकर शाम पांच बजे तक चलेगा.
उत्तर प्रदेश में कहां-कहां मतदान?
उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद, रामपुर, संभल, फ़िरोज़ाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, आंवला, बरेली और पीलीभीत पर मतदान होना है.
इसमें से रामपुर, मैनपुरी और पीलीभीत लोकसभा सीट पर बड़े नेताओं की किस्मत दांव पर लगी हुई है.
रामपुर में मुक़ाबला बीजेपी की जयाप्रदा और सपा-बसपा गठबंधन के आज़म ख़ान के बीच है तो मैनपुरी की सीट से पूर्व सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव चुनाव लड़ रहे हैं.
इसके साथ ही पीलीभीत सीट पर बीजेपी के वरुण गांधी और सपा-बसपा-रालोद के उम्मीदवार हेमराज वर्मा के बीच मुक़ाबला है.
बिहार में अररिया, झंझारपुर, सुपौल, खगड़िया और मधेपुरा में मतदान होने जा रहा है.
इनमें से अररिया लोकसभा सीट पर मुक़ाबला बीजेपी और आरजेडी के बीच है. इस सीट पर पिछले चुनाव में मोहम्मद तसलीमुद्दीन ने बीजेपी को भारी अंतर से हराया था.
लेकिन तसलीमुद्दीन की मौत के बाद इस सीट पर बीजेपी ने प्रदीप कुमार सिंह को उतारा है जिनका मुक़ाबला सरफ़राज आलम से होगा.
पश्चिम बंगाल में कहां-कहां मतदान?
पश्चिम बंगाल में माल्दा उत्तर, बालुरघाट, जंगीपुर, माल्दा दक्षिण, मुर्शिदाबाद में मतदान होने जा रहा है.
इन सीटों में से मालदा उत्तर की सीट काफ़ी अहम है क्योंकि इस सीट पर कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में शामिल हुईं मौसम नूर चुनाव लड़ रही हैं.
ममता बनर्जी कांग्रेस का गढ़ रही इस सीट को हासिल करने की पुरजोर कोशिश कर रही हैं.
वहीं, लेफ़्ट का गढ़ मानी जाने वाली मुर्शिदाबाद सीट पर सीपीएम के बदरुद्दोज़ा खान का मुक़ाबला टीएमसी के अबू तहेर ख़ान के बीच होगा.
महाराष्ट्र में कहां-कहां मतदान?
महाराष्ट्र में जलगाँव, रावेर, जालना, औरंगाबाद, रायगड, पुणे, बारामती, अहमदनगर, माढा, सांगली, सातारा, रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग, कोल्हापुर और हातकणंगले सीट पर मतदान होगा.
इनमें से बारामती, पुणे, सतारा, कोल्हापुर जैसी सीटों पर अहम मुक़ाबला है.
सतारा में उदयनराजे पी भोसले का मुक़ाबला बीजेपी के अन्नासाहेब पाटील से हैं.
वहीं, पुणे सीट पर बीजेपी के गिरीश बापट का मुक़ाबला कांग्रेस महासचिव मोहन जोशी से होगा.
कर्नाटक में कहां-कहां मतदान?
कर्नाटक में बीजापुर, गुलबर्गा, रायचूर, बीदर, कोप्पल, और चिक्कोडी में मतदान होगा.
इसके साथ ही बेलगांव, बगलकोट, धारवाड़ा, उत्तर कन्नड़, बेल्लारी, हावेरी, शिमोगा और दावणगेरे सीट पर वोट डाले जाएंगे.
गुजरात में कहां-कहां मतदान?
इस चरण में गुजरात की सभी 26 सीटों पर मतदान हो रहा है.
इन सीटों में खेड़ा, आणंद, सुरेंद्रनगर, जामनगर, पोरबंदर, भरूच, गांधीनगर, अहमदाबाद पूर्व, और अहमदाबाद पश्चिम शामिल हैं.
इसके साथ ही राजकोट, भावनगर, कच्छ, पांचमहल, वडोदरा, मेहसाणा, अमरेली, छोटा उदयपुर, सूरत, नवसारी, वलसाड, बनासकांठा, साबरकांठा, पाटन, जूनागढ़, दाहोद, और बारडोली सीट पर वोट डाले जा रहे हैं.
Tuesday, April 23, 2019
Wednesday, April 17, 2019
विश्व कप 2019: भारत या ऑस्ट्रेलिया किसकी वर्ल्ड कप टीम ज़्यादा मजबूत
आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2019 के लिए भारत के साथ ही पांच बार की वर्तमान विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया ने भी अपनी टीम की घोषणा कर दी है.
टीम में स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर की वापसी हुई. हालांकि टीम की कमान यानी कप्तानी एरॉन फिंच को ही दी गई है जिन्होंने हाल ही में भारत और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सिरीज़ में अपनी टीम को जीत दिलाई थी.
प्रतिबंध से लौटने के बाद से जहां स्टीव स्मिथ कुछ खास रंग नहीं दिखा सके हैं और आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए सात मैचों में 37.20 की औसत से महज 186 रन ही बना सके हैं. वहीं डेविड वार्नर अपने चिर परिचित अंदाज में दिख रहे हैं और फिलहाल आईपीएल 2019 में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं. अब तक खेले गए आठ मैचों में वार्नर 80 की औसत से 400 रन बना चुके हैं.
यानी विश्व कप में यदि वार्नर इसी अंदाज में खेलते रहे तो वो कितने ख़तरनाक साबित हो सकते हैं यह कयास लगाना मुश्किल नहीं होगा.
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ वनडे सिरीज़ में टिम पेन की कप्तानी में मिली 0-5 से हार के बाद फ़रवरी 2017 के बाद एरॉन फिंच को कप्तानी दी गई थी.
फिंच की कप्तानी में ऑस्ट्रेलियाई टीम अपनी ही धरती पर पहले दक्षिण अफ़्रीका से फिर भारत के हाथों वनडे सिरीज़ 1-2 से हार गई.
लेकिन चयनकर्ताओं ने उनकी कप्तानी में भरोसा जताते हुए उन्हें भारत के दौरे के लिए भी कप्तान बरकरार रखा और यहा से फिंच ने वो कमाल किया जिसकी बदौलत वो विश्व कप टीम के कप्तान चुने गए हैं.
भारत में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पहले दो मैच हारने के बाद पांच मैचों की सिरीज पर कब्जा और फिर पाकिस्तान को 5-0 से वनडे सिरीज़ में पछाड़ कर बताया कि आखिर वर्ल्ड चैंपियन खेलते कैसे हैं.
फिंच की कप्तानी में ऑस्ट्रेलियाई टीम पिछले 18 में से 10 मैच जीत चुकी है. और यह तब, जब स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर सरीखे खिलाड़ी उस टीम में शामिल नहीं थे.
अब जबकि विश्व कप की टीम में उनकी वापसी हो गई है और इस दौरान आईपीएल में स्मिथ औसत तो वार्नर अपने अव्वल फॉर्म में नज़र आ रहे हैं तो भारतीय टीम के लिए ऑस्ट्रेलिया को हरा पाना कितना मुश्किल होगा?
इन जीतों के नायब खुद कप्तान एरॉन फिंच रहे हैं तो उनके साथ ही पिच पर उतरने वाले सलामी बल्लेबाज़ उस्मान ख्वाजा इसके आधार.
इन आठ जीतों में फिंच ने 81.5 की औसत से 571 रन तो केवल 30 वनडे पुराने ख्वाजा ने 70.87 की औसत से 567 रन बनाए हैं.
टीम के मजबूत ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल ने पिछले 7 मैच में 329 रन बना चुके हैं तो शॉन मार्श ने 91 और 61 रनों की पारियां खेली हैं. उन्होंने 2018 से अब तक 18 मैचों में चार शतक भी जड़े हैं.
इधर भारत ने शिखर धवन और रोहित शर्मा पर अपनी अपनी पारी शुरू करवाने में भरोसा जताया है.
रोहित शर्मा ने बीते दो सालों में 53 मैचों में 12 शतकों के साथ 2879 रन तो उनके सलामी जोड़ीदार शिखर धवन ने इस दौरान 54 मैच खेले हैं और 7 शतकों समेत 2277 रन बनाए हैं.
इन दोनों ने जब जब भारत को अच्छी शुरुआत दी है भारतीय टीम ने विपक्षी टीम के ख़िलाफ़ मजबूत लक्ष्य रखे हैं.
भारत के पास ट्रंप कार्ड के रूप में खुद कप्तान विराट कोहली है जिन्होंने न केवल रनों का अंबार लगाने के एक से बढ़ कर एक कारनामें किए हैं बल्कि वनडे में 12 बार 200 रनों के अधिक की साझेदारी का रिकॉर्ड रखते हैं.
विराट ने अपने सलामी बल्लेबाज़ रोहित शर्मा के साथ पांच बार दोहरी शतकीय साझेदारी निभाई है.
विराट बीते दो सालों के दौरान 51 वनडे में 15 शतकों के साथ 3273 रन बनाए हैं तो वहीं 10 बार 'मैन ऑफ़ द मैच' भी बने.
इनके साथ ही टीम के पास महेंद्र धोनी जैसा बेहद अनुभवी क्रिकेटर है जिन्हें वनडे के बेस्ट फिनिशर के रूप में जाना जाता रहा है. हालांकि बढ़ती उम्र के साथ उनके इस स्किल की धार थोड़ी कुंद ज़रूर हुई है लेकिन इस दौरान उन्होंने विकेट के पीछे अपनी चपलता से कई मैचों के रुख मोड़ने का काम बखूबी किया है.
धोनी ने विकेट के पीछे से न केवल अब तक 443 खिलाड़ियों की आउट किया है बल्कि उनकी तरकश में 50 की औसत से 10 हज़ार से अधिक रन भी हैं.
साथ ही उनके पास कप्तानी का वो अनुभव है जिसकी बदौलत उन्हें विराट का डीआरएस यानी 'धोनी रिव्यू सिस्टम' की संज्ञा भी दी जाने लगी.
टीम में स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर की वापसी हुई. हालांकि टीम की कमान यानी कप्तानी एरॉन फिंच को ही दी गई है जिन्होंने हाल ही में भारत और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सिरीज़ में अपनी टीम को जीत दिलाई थी.
प्रतिबंध से लौटने के बाद से जहां स्टीव स्मिथ कुछ खास रंग नहीं दिखा सके हैं और आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए सात मैचों में 37.20 की औसत से महज 186 रन ही बना सके हैं. वहीं डेविड वार्नर अपने चिर परिचित अंदाज में दिख रहे हैं और फिलहाल आईपीएल 2019 में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं. अब तक खेले गए आठ मैचों में वार्नर 80 की औसत से 400 रन बना चुके हैं.
यानी विश्व कप में यदि वार्नर इसी अंदाज में खेलते रहे तो वो कितने ख़तरनाक साबित हो सकते हैं यह कयास लगाना मुश्किल नहीं होगा.
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ वनडे सिरीज़ में टिम पेन की कप्तानी में मिली 0-5 से हार के बाद फ़रवरी 2017 के बाद एरॉन फिंच को कप्तानी दी गई थी.
फिंच की कप्तानी में ऑस्ट्रेलियाई टीम अपनी ही धरती पर पहले दक्षिण अफ़्रीका से फिर भारत के हाथों वनडे सिरीज़ 1-2 से हार गई.
लेकिन चयनकर्ताओं ने उनकी कप्तानी में भरोसा जताते हुए उन्हें भारत के दौरे के लिए भी कप्तान बरकरार रखा और यहा से फिंच ने वो कमाल किया जिसकी बदौलत वो विश्व कप टीम के कप्तान चुने गए हैं.
भारत में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पहले दो मैच हारने के बाद पांच मैचों की सिरीज पर कब्जा और फिर पाकिस्तान को 5-0 से वनडे सिरीज़ में पछाड़ कर बताया कि आखिर वर्ल्ड चैंपियन खेलते कैसे हैं.
फिंच की कप्तानी में ऑस्ट्रेलियाई टीम पिछले 18 में से 10 मैच जीत चुकी है. और यह तब, जब स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर सरीखे खिलाड़ी उस टीम में शामिल नहीं थे.
अब जबकि विश्व कप की टीम में उनकी वापसी हो गई है और इस दौरान आईपीएल में स्मिथ औसत तो वार्नर अपने अव्वल फॉर्म में नज़र आ रहे हैं तो भारतीय टीम के लिए ऑस्ट्रेलिया को हरा पाना कितना मुश्किल होगा?
इन जीतों के नायब खुद कप्तान एरॉन फिंच रहे हैं तो उनके साथ ही पिच पर उतरने वाले सलामी बल्लेबाज़ उस्मान ख्वाजा इसके आधार.
इन आठ जीतों में फिंच ने 81.5 की औसत से 571 रन तो केवल 30 वनडे पुराने ख्वाजा ने 70.87 की औसत से 567 रन बनाए हैं.
टीम के मजबूत ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल ने पिछले 7 मैच में 329 रन बना चुके हैं तो शॉन मार्श ने 91 और 61 रनों की पारियां खेली हैं. उन्होंने 2018 से अब तक 18 मैचों में चार शतक भी जड़े हैं.
इधर भारत ने शिखर धवन और रोहित शर्मा पर अपनी अपनी पारी शुरू करवाने में भरोसा जताया है.
रोहित शर्मा ने बीते दो सालों में 53 मैचों में 12 शतकों के साथ 2879 रन तो उनके सलामी जोड़ीदार शिखर धवन ने इस दौरान 54 मैच खेले हैं और 7 शतकों समेत 2277 रन बनाए हैं.
इन दोनों ने जब जब भारत को अच्छी शुरुआत दी है भारतीय टीम ने विपक्षी टीम के ख़िलाफ़ मजबूत लक्ष्य रखे हैं.
भारत के पास ट्रंप कार्ड के रूप में खुद कप्तान विराट कोहली है जिन्होंने न केवल रनों का अंबार लगाने के एक से बढ़ कर एक कारनामें किए हैं बल्कि वनडे में 12 बार 200 रनों के अधिक की साझेदारी का रिकॉर्ड रखते हैं.
विराट ने अपने सलामी बल्लेबाज़ रोहित शर्मा के साथ पांच बार दोहरी शतकीय साझेदारी निभाई है.
विराट बीते दो सालों के दौरान 51 वनडे में 15 शतकों के साथ 3273 रन बनाए हैं तो वहीं 10 बार 'मैन ऑफ़ द मैच' भी बने.
इनके साथ ही टीम के पास महेंद्र धोनी जैसा बेहद अनुभवी क्रिकेटर है जिन्हें वनडे के बेस्ट फिनिशर के रूप में जाना जाता रहा है. हालांकि बढ़ती उम्र के साथ उनके इस स्किल की धार थोड़ी कुंद ज़रूर हुई है लेकिन इस दौरान उन्होंने विकेट के पीछे अपनी चपलता से कई मैचों के रुख मोड़ने का काम बखूबी किया है.
धोनी ने विकेट के पीछे से न केवल अब तक 443 खिलाड़ियों की आउट किया है बल्कि उनकी तरकश में 50 की औसत से 10 हज़ार से अधिक रन भी हैं.
साथ ही उनके पास कप्तानी का वो अनुभव है जिसकी बदौलत उन्हें विराट का डीआरएस यानी 'धोनी रिव्यू सिस्टम' की संज्ञा भी दी जाने लगी.
Wednesday, April 10, 2019
Unerwarteter Ärger mit dem Eigenheim
Krach um 600 000 Franken Anschlussgebühren nach BaZ-Recherchen beigelegt – Therwil will Reglement revidieren
Therwil. Es geht um viel Geld, ungenaue Verträge, Reglemente, die willkürlich wirken und am Rande auch um die umstrittene Scientology-Kirche.
Zunächst begann alles in Minne. Die Firma Swiss Immo Trust baute von 2013 bis 2014 an guter Lage in Therwil die schmucke Überbauung Untere Mühle mit 26 Eigentumswohnungen. Doch die Freude an den Eigentumswohnungen verging den Bewohnern in den letzten sechs Monaten – nicht aufgrund der Wohnungen an sich, sondern weil plötzlich Forderungen von insgesamt 600 000 Franken im Raum stehen, mit denen die Stockwerkeigentümer nicht gerechnet haben und die für einige von ihnen kaum aufzubringen sind.
Hickhack um Zahlung
Bei dem Betrag handelt es sich um die Anschlussgebühren an die Kanalisation und Wasserversorgung der Gemeinde Therwil. Für die Stockwerkeigentümer ist klar: Diese Gebühren muss der ehemalige Bauherr Swiss Immo Trust bezahlen, denn die Eigentumswohnungen wurden im Zustand «schlüsselfertig» oder «wie besichtigt» verkauft, was auch ein funktionsfähiges Kanalisationssystem mit einschliesse. Eine Einschätzung, die auf Anfrage der BaZ auch der Advokat und Vizepräsident des Hauseigentümerverbandes Baselland, Alexander Heinzelmann, teilt: «Falls nichts Gegenteiliges im Vertrag oder in zusätzlichen, integrierten Vereinbarungen steht, dürfen die Käufer davon ausgehen, dass die Anschlussgebüren im Kaufpreis inbegriffen sind.»
Die Swiss Immo Trust machte jedoch monatelang keine konkreten Anstalten, die Rechnung der Gemeinde zu übernehmen. Glaubt man Simon von Fürstenhaus*, einem der Eigentümer, macht die Firma im Gegenteil Druck: «Zunächst sagten sie uns, dass sie nicht zahlen. Später hiess es dann, dass sie für einen Deal bereit sind, wenn wir auf unseren Anwalt verzichten. Und zu guter Letzt sind sie zu mir nach Hause gekommen und haben mir angeboten, die Gebühren zu übernehmen, falls ich ihnen ein Darlehen von 200 000 bis 350 000 Franken gebe», sagt von Fürstenhaus.
Die Namen, die von Fürstenhaus in diesem Zusammenhang nennt, sind keine Unbekannten und mit der Scientology-Kirche Basel verbunden. Auch die Swiss Immo Trust taucht auf einer Beobachter-Liste der von aktiven Scientologen geführten Firmen auf. Dies, weil der frühere Verwaltungsrat der Swiss Immo Trust, Rudolf Flösser, leitender Direktor bei Scientology Basel ist. Seine Firma, die Dr. Flösser Treuhand GmbH, hat für das Projekt Untere Mühle auch die Bauherrenberatung übernommen.
«Ich habe an sich nichts gegen Scientology», sagt von Fürstenhaus, der eine Hexenjagd gegen Scientology vermeiden will. Das Verhalten der Swiss Immo Trust in den letzten Monaten findet er trotzdem nicht okay und hat sich deshalb an die BaZ gewandt. Mit Erfolg: Was lange nicht möglich schien, war nach einer Anfrage der BaZ innerhalb eines Tages machbar – die Stockwerkeigentümer haben die schriftliche Bestätigung erhalten, dass Swiss Immo Trust die Gebühren übernimmt.
Christian Varga, Verwaltungsrat der Swiss Immo Trust, bestreitet, dass er die Übernahme der Gebühren je mit der Verleihung eines Darlehens verknüpft hat. Obwohl die Swiss Immo Trust die Gebühren nun übernimmt, ist er nach wie vor der Meinung, dass diese im Preis der Wohnung nicht mit eingeschlossen waren: «Die Kanalisations- und Anschlussbeiträge waren gemäss Vertrag von den Käufern zu tragen. Da jedoch üblicherweise die Kanalisations- und Anschlussbeiträge im Kaufpreis inbegriffen sind, haben wir uns aus Kulanzgründen bereit erklärt, diese Kosten zu übernehmen.» Dies habe er den Käufern im Februar mündlich mitgeteilt: «Wir hätten dies damals schriftlich machen können statt lediglich mündlich, um Klarheit zu schaffen», erklärte Varga.
Unangenehme Situationen
Was Simon von Fürstenhaus fast noch mehr ärgert als das Verhalten von Swiss Immo Trust, ist, dass die Gemeinde die Rechnung, in Kenntnis der Fakten, trotzdem an die Stockwerkeigentümer senden wollte. «Nur aufgrund eines willkürlichen Gummi-Reglements konnte es überhaupt zu dieser unangenehmen Situation kommen.» Das Abwasserreglement der Gemeinde besagt, dass bei Neubauten das Datum der Endschätzung des Gebäudes durch die kantonale Gebäudeversicherung Stichdatum für die Beitragspflicht ist. Auf den Termin der Schätzung haben Gemeinde, Verkäufer und Käufer kaum Einfluss. Im Fall der Unteren Mühle führte dieses Stichdatum dazu, dass die Rechnung trotz schlüsselfertigem Kauf an die Stockwerkeigentümer ging.
«Dieses Reglement ist veraltet, das muss auch die Gemeinde sehen. Sie hätte sich in dieser Angelegenheit auf unsere Seite stellen müssen», sagt von Fürstenhaus enttäuscht.
Laut Gemeindeverwalter Theo Kim muss die Gemeinde die Rechnung dem zum Zeitpunkt der Rechnungsstellung im Grundbuch eingetragenen Eigentümer stellen – ausser der Verkäufer bestätigt der Gemeinde, dass er die Kosten übernimmt, was im Fall von Swiss Immo Trust bisher offenbar nicht der Fall war. Die Schwächen des 25-jährigen Reglements, das ähnlich auch in vielen anderen Gemeinden in Kraft ist, sieht er jedoch auch: «Wir haben bemerkt, dass es in Einzelfällen zu verzwickten und unangenehmen Situationen führen kann.
Es gab auch einen Fall, bei dem Käufer tatsächlich zweimal bezahlen mussten», sagt Kim. Deshalb soll das Reglement noch dieses Jahr revidiert und vor die Gemeindeversammlung gebracht werden: «Darin ist vorgesehen, dass die Rechnung zu einem früheren Zeitpunkt erfolgt, zu dem der Verkäufer im Normalfall noch der Besitzer ist.» Einen Fall wie jenen der Unteren Mühle gäbe es dann nicht mehr.
Therwil. Es geht um viel Geld, ungenaue Verträge, Reglemente, die willkürlich wirken und am Rande auch um die umstrittene Scientology-Kirche.
Zunächst begann alles in Minne. Die Firma Swiss Immo Trust baute von 2013 bis 2014 an guter Lage in Therwil die schmucke Überbauung Untere Mühle mit 26 Eigentumswohnungen. Doch die Freude an den Eigentumswohnungen verging den Bewohnern in den letzten sechs Monaten – nicht aufgrund der Wohnungen an sich, sondern weil plötzlich Forderungen von insgesamt 600 000 Franken im Raum stehen, mit denen die Stockwerkeigentümer nicht gerechnet haben und die für einige von ihnen kaum aufzubringen sind.
Hickhack um Zahlung
Bei dem Betrag handelt es sich um die Anschlussgebühren an die Kanalisation und Wasserversorgung der Gemeinde Therwil. Für die Stockwerkeigentümer ist klar: Diese Gebühren muss der ehemalige Bauherr Swiss Immo Trust bezahlen, denn die Eigentumswohnungen wurden im Zustand «schlüsselfertig» oder «wie besichtigt» verkauft, was auch ein funktionsfähiges Kanalisationssystem mit einschliesse. Eine Einschätzung, die auf Anfrage der BaZ auch der Advokat und Vizepräsident des Hauseigentümerverbandes Baselland, Alexander Heinzelmann, teilt: «Falls nichts Gegenteiliges im Vertrag oder in zusätzlichen, integrierten Vereinbarungen steht, dürfen die Käufer davon ausgehen, dass die Anschlussgebüren im Kaufpreis inbegriffen sind.»
Die Swiss Immo Trust machte jedoch monatelang keine konkreten Anstalten, die Rechnung der Gemeinde zu übernehmen. Glaubt man Simon von Fürstenhaus*, einem der Eigentümer, macht die Firma im Gegenteil Druck: «Zunächst sagten sie uns, dass sie nicht zahlen. Später hiess es dann, dass sie für einen Deal bereit sind, wenn wir auf unseren Anwalt verzichten. Und zu guter Letzt sind sie zu mir nach Hause gekommen und haben mir angeboten, die Gebühren zu übernehmen, falls ich ihnen ein Darlehen von 200 000 bis 350 000 Franken gebe», sagt von Fürstenhaus.
Die Namen, die von Fürstenhaus in diesem Zusammenhang nennt, sind keine Unbekannten und mit der Scientology-Kirche Basel verbunden. Auch die Swiss Immo Trust taucht auf einer Beobachter-Liste der von aktiven Scientologen geführten Firmen auf. Dies, weil der frühere Verwaltungsrat der Swiss Immo Trust, Rudolf Flösser, leitender Direktor bei Scientology Basel ist. Seine Firma, die Dr. Flösser Treuhand GmbH, hat für das Projekt Untere Mühle auch die Bauherrenberatung übernommen.
«Ich habe an sich nichts gegen Scientology», sagt von Fürstenhaus, der eine Hexenjagd gegen Scientology vermeiden will. Das Verhalten der Swiss Immo Trust in den letzten Monaten findet er trotzdem nicht okay und hat sich deshalb an die BaZ gewandt. Mit Erfolg: Was lange nicht möglich schien, war nach einer Anfrage der BaZ innerhalb eines Tages machbar – die Stockwerkeigentümer haben die schriftliche Bestätigung erhalten, dass Swiss Immo Trust die Gebühren übernimmt.
Christian Varga, Verwaltungsrat der Swiss Immo Trust, bestreitet, dass er die Übernahme der Gebühren je mit der Verleihung eines Darlehens verknüpft hat. Obwohl die Swiss Immo Trust die Gebühren nun übernimmt, ist er nach wie vor der Meinung, dass diese im Preis der Wohnung nicht mit eingeschlossen waren: «Die Kanalisations- und Anschlussbeiträge waren gemäss Vertrag von den Käufern zu tragen. Da jedoch üblicherweise die Kanalisations- und Anschlussbeiträge im Kaufpreis inbegriffen sind, haben wir uns aus Kulanzgründen bereit erklärt, diese Kosten zu übernehmen.» Dies habe er den Käufern im Februar mündlich mitgeteilt: «Wir hätten dies damals schriftlich machen können statt lediglich mündlich, um Klarheit zu schaffen», erklärte Varga.
Unangenehme Situationen
Was Simon von Fürstenhaus fast noch mehr ärgert als das Verhalten von Swiss Immo Trust, ist, dass die Gemeinde die Rechnung, in Kenntnis der Fakten, trotzdem an die Stockwerkeigentümer senden wollte. «Nur aufgrund eines willkürlichen Gummi-Reglements konnte es überhaupt zu dieser unangenehmen Situation kommen.» Das Abwasserreglement der Gemeinde besagt, dass bei Neubauten das Datum der Endschätzung des Gebäudes durch die kantonale Gebäudeversicherung Stichdatum für die Beitragspflicht ist. Auf den Termin der Schätzung haben Gemeinde, Verkäufer und Käufer kaum Einfluss. Im Fall der Unteren Mühle führte dieses Stichdatum dazu, dass die Rechnung trotz schlüsselfertigem Kauf an die Stockwerkeigentümer ging.
«Dieses Reglement ist veraltet, das muss auch die Gemeinde sehen. Sie hätte sich in dieser Angelegenheit auf unsere Seite stellen müssen», sagt von Fürstenhaus enttäuscht.
Laut Gemeindeverwalter Theo Kim muss die Gemeinde die Rechnung dem zum Zeitpunkt der Rechnungsstellung im Grundbuch eingetragenen Eigentümer stellen – ausser der Verkäufer bestätigt der Gemeinde, dass er die Kosten übernimmt, was im Fall von Swiss Immo Trust bisher offenbar nicht der Fall war. Die Schwächen des 25-jährigen Reglements, das ähnlich auch in vielen anderen Gemeinden in Kraft ist, sieht er jedoch auch: «Wir haben bemerkt, dass es in Einzelfällen zu verzwickten und unangenehmen Situationen führen kann.
Es gab auch einen Fall, bei dem Käufer tatsächlich zweimal bezahlen mussten», sagt Kim. Deshalb soll das Reglement noch dieses Jahr revidiert und vor die Gemeindeversammlung gebracht werden: «Darin ist vorgesehen, dass die Rechnung zu einem früheren Zeitpunkt erfolgt, zu dem der Verkäufer im Normalfall noch der Besitzer ist.» Einen Fall wie jenen der Unteren Mühle gäbe es dann nicht mehr.
Monday, April 1, 2019
कांग्रेस आज जारी करेगी घोषणापत्र: आज की पांच बड़ी ख़बरें
कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार, दो अप्रैल को आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी करने का ऐलान किया है.
सात चरणों में होने वाले आगामी लोकसभा चुनाव के पहले चरण के लिए वोटिंग में अब सिर्फ 9 दिन बचे हैं.
ऐसे में कांग्रेस पार्टी पहले चरण के मतदान से पहले ही अपने वादों के साथ जनता के बीच उतरने की कोशिश कर रह है.
बिहार पहुंचेंगे मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आम चुनाव का एलान होने के बाद पहली बार बिहार का दौरा करने वाले हैं. वे मंगलवार को जमुई और गया में चुनावी जनसभाओं को संबोधित करेंगे.
जमुई बीजेपी की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान की सीट है.
प्रधानमंत्री मोदी पिछले महीने भी बिहार गए थे जब तीन मार्च को उन्होंने पटना में एनडीए की एक रैली को संबोधित किया था.
आज ही से प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अपना चुनावी अभियान शुरु कर रहे हैं.
नमोटीवी के ख़िलाफ़ कांग्रेस पहुंचा चुनाव आयोग
नमोटीवी के ख़िलाफ़ कांग्रेस ने चुनान आयोग का दरवाज़ा खटखटाया है और कहा है कि चुनाव के वक्त भाजपा इसके ज़रिए प्रोपोगैंडा फैलाने की कोशिश कर रही है.
चुनाव आयोग को लिखे एक पत्र में कांग्रेस ने कहा है कि प्रधानमंत्री के पर्सनल टीवी चैनल 'कॉटेंट टीवी' को हाल में कुछ डीटीएच प्लेफॉर्म्स पर लांच किया गया है, जिसमें बीजेपी से जुड़े विज्ञापन और बीजेपी की चुनावी रेलियां दिखाई जा रही हैं. इसके ख़िलाफ़ तुरंत कदम उठाए जाने चाहिए.
साथ ही चुनाव आयोग को लिखे एक और पत्र में कांग्रेस ने कहा है कि "सरकारी टीवी चैनल दूरदर्शन का भी ग़लत इस्तेमाल चुनाव प्रधानमंत्री की उपलब्धियां गिनवाने के लिए किया जा रहा है. ये ऑल इंडिया रेडिया और दूरदर्शन के लिए जारी चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है."
इससे पहले दिल्ली की आम आदमी पार्टी 24 घंटे वाले चैनल- नमोटीवी के ख़िलाफ़ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करा चुकी है.
कांग्रेस-आप गठबंधन
दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गंठबंधन को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि हम राहुल गांधी के बात कर चुके हैं अब किसी और से बात करने की कोई ज़रूरत नहीं है.
वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित ने गठबंधन की अटकलों पर लगम लगाते हुए कहा है कि लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी सातों सीटों पर कांग्रेस को जीतना है.
ब्रितानी सांसद एक बार फिर ब्रेक्ज़िट के मुद्दे पर किसी वैकल्पिक रणनीति तक पहुंचने में नाकाम रहे हैं.
सांसदों ने सोमवार को यूरोपीय संघ से अलग होने के चार प्रस्तावित विकल्पों पर मतदान किया जिनमें से कोई भी पारित नहीं हो सका. इनमें कस्टम्स यूनियन के लिए यूरोपीय संघ से वार्ता करना करने का प्रस्ताव सिर्फ़ तीन मतों से गिर गया.
ब्रितानी प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे आज आगे की रणनीति बनाने के लिए लंबी कैबिनेट बैठक करने जा रही हैं. वो ब्रेक्ज़िट को लेकर अपने समझौते को चौथी बार संसद में पेश कर सकती हैं.
सात चरणों में होने वाले आगामी लोकसभा चुनाव के पहले चरण के लिए वोटिंग में अब सिर्फ 9 दिन बचे हैं.
ऐसे में कांग्रेस पार्टी पहले चरण के मतदान से पहले ही अपने वादों के साथ जनता के बीच उतरने की कोशिश कर रह है.
बिहार पहुंचेंगे मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आम चुनाव का एलान होने के बाद पहली बार बिहार का दौरा करने वाले हैं. वे मंगलवार को जमुई और गया में चुनावी जनसभाओं को संबोधित करेंगे.
जमुई बीजेपी की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान की सीट है.
प्रधानमंत्री मोदी पिछले महीने भी बिहार गए थे जब तीन मार्च को उन्होंने पटना में एनडीए की एक रैली को संबोधित किया था.
आज ही से प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अपना चुनावी अभियान शुरु कर रहे हैं.
नमोटीवी के ख़िलाफ़ कांग्रेस पहुंचा चुनाव आयोग
नमोटीवी के ख़िलाफ़ कांग्रेस ने चुनान आयोग का दरवाज़ा खटखटाया है और कहा है कि चुनाव के वक्त भाजपा इसके ज़रिए प्रोपोगैंडा फैलाने की कोशिश कर रही है.
चुनाव आयोग को लिखे एक पत्र में कांग्रेस ने कहा है कि प्रधानमंत्री के पर्सनल टीवी चैनल 'कॉटेंट टीवी' को हाल में कुछ डीटीएच प्लेफॉर्म्स पर लांच किया गया है, जिसमें बीजेपी से जुड़े विज्ञापन और बीजेपी की चुनावी रेलियां दिखाई जा रही हैं. इसके ख़िलाफ़ तुरंत कदम उठाए जाने चाहिए.
साथ ही चुनाव आयोग को लिखे एक और पत्र में कांग्रेस ने कहा है कि "सरकारी टीवी चैनल दूरदर्शन का भी ग़लत इस्तेमाल चुनाव प्रधानमंत्री की उपलब्धियां गिनवाने के लिए किया जा रहा है. ये ऑल इंडिया रेडिया और दूरदर्शन के लिए जारी चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है."
इससे पहले दिल्ली की आम आदमी पार्टी 24 घंटे वाले चैनल- नमोटीवी के ख़िलाफ़ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करा चुकी है.
कांग्रेस-आप गठबंधन
दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गंठबंधन को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि हम राहुल गांधी के बात कर चुके हैं अब किसी और से बात करने की कोई ज़रूरत नहीं है.
वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित ने गठबंधन की अटकलों पर लगम लगाते हुए कहा है कि लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी सातों सीटों पर कांग्रेस को जीतना है.
ब्रितानी सांसद एक बार फिर ब्रेक्ज़िट के मुद्दे पर किसी वैकल्पिक रणनीति तक पहुंचने में नाकाम रहे हैं.
सांसदों ने सोमवार को यूरोपीय संघ से अलग होने के चार प्रस्तावित विकल्पों पर मतदान किया जिनमें से कोई भी पारित नहीं हो सका. इनमें कस्टम्स यूनियन के लिए यूरोपीय संघ से वार्ता करना करने का प्रस्ताव सिर्फ़ तीन मतों से गिर गया.
ब्रितानी प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे आज आगे की रणनीति बनाने के लिए लंबी कैबिनेट बैठक करने जा रही हैं. वो ब्रेक्ज़िट को लेकर अपने समझौते को चौथी बार संसद में पेश कर सकती हैं.
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