राज्य में विज्ञापन जारी करने वाली संस्था सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (पीआरडी) ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत यह जानकारी दी है.
सरकार के अवर सचिव रामेश्वर लेयांगी ने बताया है कि राज्य सरकार ने साल 2014 से 12 दिसंबर 2018 तक विज्ञापन मद में ख़र्च के लिए 323 करोड़, 76 लाख, 81 हजार रुपये का आवंटन किया है.
इसमें से अधिकतर राशि खर्च भी कर दी गई है. इस दौरान दो वित्तीय वर्षो में सरकार ने एक रुपये भी नहीं बचाए और एक वित्तीय वर्ष में सिर्फ 620 रुपये की बचत की. इस साल 12 दिसंबर तक सरकार 62 करोड़ 20 लाख से भी अधिक रुपए ख़र्च कर चुकी है.
कोडरमा के सामाजिक कार्यकर्ता ओंकार विश्वकर्मा ने आरटीआई के तहत सरकार से यह जानकारी मांगी थी. सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने 17 दिसंबर को उनसे यह सूचना साझा की.
यह इत्तेफाक ही है कि यह सूचना झारखंड की भाजपा सरकार की चौथी वर्षगांठ से ठीक पहले सार्वजनिक हुई. इस कारण विपक्ष को बैठे-बिठाए बड़ा मुद्दा मिल गया है और संपूर्ण विपक्ष ने सरकार की आलोचना की है.
भाजपा नेता रघुवर दास ने 28 दिसंबर 2014 को झारखंड के दसवें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी. अपने कार्यकाल के चार साल पूरे होने पर भी सरकार ने ख़ूब विज्ञापन दिए हैं.
पूरे राज्य में सरकार की उपलब्धियों के होर्डिंग्स लगाए गए हैं. साथ ही अ़खबारों और निजी चैनलों को भी विज्ञापन जारी किए गए हैं.
क्यों मांगी यह सूचना
ओंकार विश्वकर्मा ने बीबीसी से कहा, "मैं हर जगह सरकार के होर्डिंग्स देखता हूं. इनमे मुख्यमंत्री जी की बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगी होती हैं. अख़बारों के पहले पन्ने सिर्फ सरकारी विज्ञापनों से भरे रहते हैं. पहले ऐसा नहीं होता था."
"इस कारण मुझे जिज्ञासा हुई कि इन विज्ञापनों मे सरकार आखिर कितने पैसे खर्च कर रही है. तब मैंने आरटीआई लगाकर सरकार से इस ख़र्च का ब्योरा मांगा. इसमें ख़ुलासा हुआ कि चार साल के अंदर सरकार ने विज्ञापन मद में आवंटन सीधे दोगुना कर दिया है."
उन्होंने कहा कि साल 2014-15 के लिए इस मद में आवंटित 40 करोड़ की जगह 2018-19 में यह बजट 80 करोड़ कर दिया गया है.
"इस राज्य में लोगों की भूख से मौतें हो रही है और सरकार अपनी ब्रांडिंग करने में मस्त है. इन्हें बेपर्दा किया जाना चाहिए."
साल 2017 में 28 सितंबर को प्रदेश के सिमडेगा ज़िले के कारीमाटी में 11 साल की संतोषी कुमारी की मौत भूख से हो गई थी. उनकी मां कोयली देवी बताती हैं कि उनकी बेटी ने 'भात-भात' की रट लगाते हुए दम तोड़ दिया था.
यह मामला सुर्ख़ियों में रहा था और झारखंड समेत पूरे देश में भूख से हो रही मौत पर गंभीर बहसों की शुरुआत हुई थी. कुछ सोशल एक्टिविस्ट द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों के मुताबिक़, पिछले चार साल के दौरान देश में 56 लोगों की मौत भूख से हो चुकी है. इनमें से 42 मौतें 2017-18 के दौरान हुई हैं. इन आंकड़ों को मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता रितिका खेड़ा और सिराज दत्ता ने स्वाति नारायण की मदद से तैयार किया है.
Thursday, December 27, 2018
Tuesday, December 18, 2018
अठावले ने कहा, धीरे-धीरे मिलेंगे 15 लाख रुपए: प्रेस रिव्यू
प्रधानमंत्री के 2014 के चुनाव वादों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री और एनडीए में सहयोगी रामदास अठावले ने कहा है कि लोगों के बैंक खाते में 15 लाख रुपए आएंगे.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उन्होंने कहा कि 15 लाख रुपए एक बार में नहीं आ जाएंगे, वो धीरे-धीरे लोगों को मिलेंगे.
उन्होंने कहा कि सरकार के पास ज़्यादा पैसा नहीं है और आरबीआई से पैसा मांगा गया था, लेकिन वो पैसा दे नहीं रही है.
अठावले के मुताबिक वादा पूरा करने में कुछ तकनीकी मुश्किलें आ रही हैं, "लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बहुत ही सक्रिय प्रधानमंत्री हैं और उनके कार्यकाल में लोगों की कई समस्याएं दूर हुई हैं."
आर्थिक संकट से उबरने के लिए पाकिस्तान कई दिनों से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) से मदद की गुहार लगा रहा है.
लेकिन बेलआउट पैकेज के लिए अमरीका पाकिस्तान के सामने कुछ शर्ते रख सकता है. ये जानकारी अमरीका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर दी है.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक अमरीका कह सकता है कि पाकिस्तान को आईएमएफ़ से पैकेज तभी मिलेगी जब वो:
टाइम्स ऑफ इंडियाअखबार के मुताबिक उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 99% वस्तुओं को जीएसटी के 18% या उससे कम के स्लैब में लाने के लिए काम कर रही है.
उनका कहना है कि जीएसटी का 28% का स्लैब सिर्फ एक फीसदी लग्ज़री उत्पादों के लिए होगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा, "जीएसटी से पहले देश में केवल 65 लाख उद्यम ही पंजीकृत थे, जिसमें 55 लाख की बढ़ोतरी हुई है."
राहुल गठबंधन के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नहीं: अखिलेश
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीवारी से वो सहमत नहीं हैं.
अमर उजाला के मुताबिक अखिलेश ने मंगलवार को कहा, अगर कोई ऐसा विचार दे रहा है तो ज़रूरी नहीं है कि गठबंधन की भी यही राय हो.
डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन ने दो दिन पहले राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी का समर्थन किया था.
अखिलेश ने कहा कि महागठबंधन की बात चल रही है, लेकिन अबतक इसने कोई मूर्त रूप नहीं लिया है. इसलिए इस तरह के प्रस्ताव ज़्यादा मायने नहीं रखते.
हर किसान का कर्ज़ माफ कराकर रहेंगे'
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसानों का कर्ज़ माफ करने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है.
द हिंदू की ख़बर के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी और विपक्ष के दूसरे दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव डालकर पूरे देश के किसानों का कर्ज़ माफ करवाएंगे.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उन्होंने कहा कि 15 लाख रुपए एक बार में नहीं आ जाएंगे, वो धीरे-धीरे लोगों को मिलेंगे.
उन्होंने कहा कि सरकार के पास ज़्यादा पैसा नहीं है और आरबीआई से पैसा मांगा गया था, लेकिन वो पैसा दे नहीं रही है.
अठावले के मुताबिक वादा पूरा करने में कुछ तकनीकी मुश्किलें आ रही हैं, "लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बहुत ही सक्रिय प्रधानमंत्री हैं और उनके कार्यकाल में लोगों की कई समस्याएं दूर हुई हैं."
आर्थिक संकट से उबरने के लिए पाकिस्तान कई दिनों से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) से मदद की गुहार लगा रहा है.
लेकिन बेलआउट पैकेज के लिए अमरीका पाकिस्तान के सामने कुछ शर्ते रख सकता है. ये जानकारी अमरीका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर दी है.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक अमरीका कह सकता है कि पाकिस्तान को आईएमएफ़ से पैकेज तभी मिलेगी जब वो:
टाइम्स ऑफ इंडियाअखबार के मुताबिक उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 99% वस्तुओं को जीएसटी के 18% या उससे कम के स्लैब में लाने के लिए काम कर रही है.
उनका कहना है कि जीएसटी का 28% का स्लैब सिर्फ एक फीसदी लग्ज़री उत्पादों के लिए होगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा, "जीएसटी से पहले देश में केवल 65 लाख उद्यम ही पंजीकृत थे, जिसमें 55 लाख की बढ़ोतरी हुई है."
राहुल गठबंधन के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नहीं: अखिलेश
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीवारी से वो सहमत नहीं हैं.
अमर उजाला के मुताबिक अखिलेश ने मंगलवार को कहा, अगर कोई ऐसा विचार दे रहा है तो ज़रूरी नहीं है कि गठबंधन की भी यही राय हो.
डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन ने दो दिन पहले राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी का समर्थन किया था.
अखिलेश ने कहा कि महागठबंधन की बात चल रही है, लेकिन अबतक इसने कोई मूर्त रूप नहीं लिया है. इसलिए इस तरह के प्रस्ताव ज़्यादा मायने नहीं रखते.
हर किसान का कर्ज़ माफ कराकर रहेंगे'
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसानों का कर्ज़ माफ करने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है.
द हिंदू की ख़बर के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी और विपक्ष के दूसरे दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव डालकर पूरे देश के किसानों का कर्ज़ माफ करवाएंगे.
Friday, December 14, 2018
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सौदे में कारोबारी पक्षपात के सबूत नहीं मिले; सभी याचिकाएं खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की निगरानी में राफेल डील की जांच की मांग से जुड़ी संभी याचिकाएं शुक्रवार को खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा- राफेल की खरीद प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है। इसमें कारोबारी पक्षपातों जैसी कोई बात सामने नहीं आई है। 14 नवंबर को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 3 अहम बातें
ऐसे मामले में न्यायिक समीक्षा का नियम तय नहीं है। राफेल सौदे की प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है। 36 विमान खरीदने के फैसले पर सवाल उठाना गलत है।
रिलायंस को ऑफसेट पार्टनर चुनने में कमर्शियल फेवर के कोई सबूत नहीं। देश फाइटर एयरक्राफ्ट की तैयारियों में कमी को नहीं झेल सकता।
कुछ लोगों की धारणा के आधार पर कोर्ट कोई आदेश नहीं दे सकता। इसलिए सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं।
अनिल अंबानी ने कहा- आरोप राजनीति से प्रेरित थे
कोर्ट के फैसले पर रिलायंस डिफेंस के मालिक अनिल अंबानी ने कहा- हम राष्ट्र सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल पर अभी तक दाखिल सभी पीआईएल को खारिज कर दिया है और हम इसका स्वागत करते हैं। रिलायंस ग्रुप और मेरे खिलाफ जितने भी आरोप लगाए गए सभी आधारहीन और राजनीति से प्रेरित थे।
दोबारा अपील की जा सकती है
याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कोर्ट के फैसले को गलत बताया। उन्होंने कहा कि एयरफोर्स ने कभी नहीं कहा कि 36 राफेल चाहिए। उससे पूछे बगैर मोदीजी ने फ्रांस जाकर समझौता कर लिया। तय कीमत से ज्यादा पैसा दिया गया। विमान की कीमतों पर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी गई। इसकी हमें कोई जानकारी नहीं दी गई। कोर्ट ने ऑफसेट पार्टनर चुनने के तरीके को भी गलत नहीं माना। उसका कहना है कि ऑफसेट पार्टनर दैसो ने चुना जबकि रक्षा सौदे में बिना सरकार की सहमति के कोई फैसला नहीं लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुनर्विचार याचिका दायर करने के बारे में तय किया जाएगा।
जांच की मांग के लिए 3 से ज्यादा याचिकाएं दायर हुई थीं
इस मामले में अधिवक्ता एमएल शर्मा, विनीत ढांडा ने याचिका दायर की थी। इसके बाद आप नेता संजय सिंह ने भी याचिका दायर की।
तीन याचिकाएं दायर होने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने याचिकाएं दायर की थीं। इसमें कहा गया था कि अदालत सीबीआई को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे।
कीमत पर सीलबंद दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपा था
सरकार ने अदालत और याचिकाकर्ताओं को डील के संबंध में लिए गए फैसलों के दस्तावेज सौंपे थे। राफेल की कीमत को लेकर एक अलग सीलबंद दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपा गया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 3 अहम बातें
ऐसे मामले में न्यायिक समीक्षा का नियम तय नहीं है। राफेल सौदे की प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है। 36 विमान खरीदने के फैसले पर सवाल उठाना गलत है।
रिलायंस को ऑफसेट पार्टनर चुनने में कमर्शियल फेवर के कोई सबूत नहीं। देश फाइटर एयरक्राफ्ट की तैयारियों में कमी को नहीं झेल सकता।
कुछ लोगों की धारणा के आधार पर कोर्ट कोई आदेश नहीं दे सकता। इसलिए सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं।
अनिल अंबानी ने कहा- आरोप राजनीति से प्रेरित थे
कोर्ट के फैसले पर रिलायंस डिफेंस के मालिक अनिल अंबानी ने कहा- हम राष्ट्र सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल पर अभी तक दाखिल सभी पीआईएल को खारिज कर दिया है और हम इसका स्वागत करते हैं। रिलायंस ग्रुप और मेरे खिलाफ जितने भी आरोप लगाए गए सभी आधारहीन और राजनीति से प्रेरित थे।
दोबारा अपील की जा सकती है
याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कोर्ट के फैसले को गलत बताया। उन्होंने कहा कि एयरफोर्स ने कभी नहीं कहा कि 36 राफेल चाहिए। उससे पूछे बगैर मोदीजी ने फ्रांस जाकर समझौता कर लिया। तय कीमत से ज्यादा पैसा दिया गया। विमान की कीमतों पर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी गई। इसकी हमें कोई जानकारी नहीं दी गई। कोर्ट ने ऑफसेट पार्टनर चुनने के तरीके को भी गलत नहीं माना। उसका कहना है कि ऑफसेट पार्टनर दैसो ने चुना जबकि रक्षा सौदे में बिना सरकार की सहमति के कोई फैसला नहीं लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुनर्विचार याचिका दायर करने के बारे में तय किया जाएगा।
जांच की मांग के लिए 3 से ज्यादा याचिकाएं दायर हुई थीं
इस मामले में अधिवक्ता एमएल शर्मा, विनीत ढांडा ने याचिका दायर की थी। इसके बाद आप नेता संजय सिंह ने भी याचिका दायर की।
तीन याचिकाएं दायर होने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने याचिकाएं दायर की थीं। इसमें कहा गया था कि अदालत सीबीआई को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे।
कीमत पर सीलबंद दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपा था
सरकार ने अदालत और याचिकाकर्ताओं को डील के संबंध में लिए गए फैसलों के दस्तावेज सौंपे थे। राफेल की कीमत को लेकर एक अलग सीलबंद दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंपा गया था।
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